मीन राशि की आयु : जाने मीन राशि की आयु कितनी होती हैं और ये कितने दिन जीते हैं-

किसी भी व्यक्ति की आयु की पूर्ण जानकारी हमेशा भगवान के पास ही होती है, लेकिन ज्योतिष के सहययता से आप अपने जीवन चक्र के बारे में सही और सटीक अनुमान लगा सकते है। ज्योतिष एक ऐसा विज्ञान है जो हम सभी के जीवन-चक्र, आयु, गुण-अवगुण, चरित्र आदि के बारे में आईना दिखाने का काम करता है। आईये ज्योतष की सहायता से जाने, मीन राशि की आयु कितनी होती है।

मीन राशि: तीन नक्षत्र और 9 चरण मिल कर एक मीन राशि बनता है जिसमे पूर्व भाद्रपद नक्षत्र का एक चौथा चरण, उतरा भाद्रपद नक्षत्र का चार चरण और रेवती नक्षत्र का चार चरण शामिल होता है। इसके स्वामी ग्रह गुरु होते है। मीन, राशि चक्र की 12वीं राशि है। इस राशि के नाम का पहला अक्षर दी, दू, घ, झ, ञ, दे, दो, चा और ची होता है। मीन राशि के लोग आकर्षणक व्यक्तित्व के कल्पनाशील विचारो वाले, विना रोक-टोक के जीवन जीने वाले, कोमल, निस्वार्थ, और दयालु होते है।

आयु

किसी की आयु जानना एक कठिन विषय है क्योंकि जन्म-मरण ईश्वर के हाथो में होता हैं।
फिर भी आप ज्योति में राशि के आधार पर अपने या दूसरे किसी का आयु पता कर सकते है।
ज्योतिष एक ऐसा माध्यम है जो हम सभी के जीवन-चक्र, आयु, गुण-अवगुण, चरित्र आदि के बारे में आईना दिखाने का काम करता है। जिससे काफी हद तक अपना या दूसरे किसी का आयु जाना जा सकता है।

किसी भी व्यक्ति की आयु उसके खान-पान, अच्छे-बुरे कर्म, स्वभाव और
जन्म के समय नक्षत्र की स्थिति आदि पर निर्भर करता है।

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मीन राशि की आयु

जाने मीन राशि की आयु कितनी होती हैं और ये कितने दिन जीते हैं-

मीन राशि में जन्म लेने वालो के लिए उनके आयु का 18वाँ और 33वाँ वर्ष काफी कष्ट देने वाला होता है।
इनको 18 वर्ष की आयु में दुर्घटना जैसे कष्ट होता है। 33 वर्ष की आयु होने पर शरीर में रोग उतपन्न होता है।
शुभ ग्रहो की दृष्टि पड़ने से यदि ये इन कष्टों से बच जाते है तो ऐसे में इनका आयु लम्बा होता है।
फिर आगे चल के 61 वर्ष की आयु में इनके जीवन में सबसे खतरनाक समय आता है,
और इस समय मीन राशि वालो को मृत्यु तुल्य कष्ट होता है तब इनकी मृत्यु भी हो सकती है।

इस समय ये शुभ ग्रहो के दृस्टि और अपने अच्छे खानपान और अच्छे कर्म -स्वभाव से मृत्यु को टाल देते है
तो ये दीर्घआयु 
होते है। और अंत में मीन राशि के जातक 65, 80 से 88 या 91 वर्ष की आयु में
माघ शुक्लपक्ष, पुनर्वसु नक्षत्र में द्वादशी तिथि को गुरुवार के दिन प्रातः काल में ये देह का त्याग करते है।

लेकिन यह नियम सभी व्यक्ति पर लागु नहीं होती है।
यह नियम उस व्यक्ति पर लागु होगा, जिस व्यक्ति के जन्म के आधार पर नाम निकाला गया हो और व्यक्ति मीन राशि का हो।

आयु के प्रकार

आयु तीन प्रकार की होती है। अल्प आयु, माध्यम आयु, और पूर्ण आयु इसके अतिरिक्त बालारिष्ट भी होता हैl
बालारिष्ट 5 वर्ष तक होता है जिसमे बच्चे 5 वर्ष की आयु या उससे कम की आयु में मृत्यु को प्राप्त कर लेते है।
लेकिन अल्प वायु के अंदर 5 वर्ष से लेकर 32 वर्ष तक व्यक्ति जीता है।
वही मध्यम आयु की बात करे तो व्यक्ति 32 वर्ष से लेकर 64 वर्ष तक जीता है,
और पूर्ण आयु में व्यक्ति 64 वर्ष से लेकर जब तक मृत्यु नहीं आ जाती तब तक जीवित रहता है।

मृत्यु कारक क्या-क्या होता है-

बालारिष्ट, अल्प आयु, माध्यम आयु, और पूर्ण आयु इसके अतिरिक्त मृत्यु कारक योग भी प्राप्त होते है।

मृत्यु कारक मे मार्केश की दशा, द्वितीयेश की दशा, सप्तमेश की अंतर दशाएं या सप्तमेश की महादशा आ जाये या इन दोनों के अंदर अगर द्वादेश, षष्टेश, अष्टमेश की प्रत्यंत दशा आ जाये तो मृत्यु प्रभावी हो जाती है और व्यक्ति की अल्प आयु में ही मृत्यु हो जाती है।

लेकिन अगर किसी की आयु पूर्ण है और मार्केश अल्प आयु में आ जाती है,
तो वहां पर मृत्यु नहीं होती है, लेकिन ये मृत्यु तुल्य कष्ट जरूर देती है।

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मीन राशि की आयु से सम्बन्धित उपाय

अल्प आयु होने पर क्या करें-

आयु 5 वर्ष से लेकर 33 वर्ष तक का होने का मतलब है की आयु अल्प है यानि अल्प आयु है, अर्थात व्यक्ति अपने आयु के 5 से 33 वर्ष की आयु में ही मृत्यु को प्राप्त कर लेगा। अल्प आयु से छुटकारा पाने के लिए मीन राशि वाले प्रत्येक गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा करें, उनके सहस्त्र नामों का जाप करें,और गुरुवार के दिन पिले वस्त्र या पिले खाने वाले पदार्थो का दान करें। इतना करने से अल्प आयु दोष खत्म होता है।

पूर्ण आयु होने के बाद भी मृत्यु तुल्य कष्ट होने पर क्या करें

यदि किसी व्यक्ति की आयु पूर्ण होती है और तब मारकेश की देश आ जाती है,
तो ऐसे में व्यक्ति मृत्यु तुल्य कस्ट भोगने के लिए मजबूर हो जाता है।
इस स्थिति में व्यक्ति को भगवन शिव की पूजा करके इस समय को टालने का प्रयाश करनी चाहिए।

मीन राशि की आयु से सम्बन्धित प्रश्न

प्रश्न- मीन राशि की आयु कितनी होती है?

उत्तर- बालारिष्ट, अल्प आयु, मार्केश की दशा, द्वितीयेश की दशा, सप्तमेश की अंतर दशाएं या सप्तमेश की महादशा या
इन दोनों के अंदर द्वादेश षष्टेश अष्टमेश की प्रत्यंत दशा से बचने के बाद मीन राशि वाले दीर्घायु होते है,
अगर इन पर शुभ ग्रहो के दृस्टि हो और  इनके अच्छे खानपान एवं अच्छे कर्म -स्वभाव हो।

प्रश्न- मीन राशि की मृत्यु कब होती है?

उत्तर- मीन राशि अगर शुभ ग्रहो के दृस्टि, अच्छे खानपान और अच्छे कर्म -स्वभाव से मृत्यु को टाल देते है,
तो ये दीर्घआयु
 होते है। और अंत में मीन राशि के जातक 65, 80 से 88 या 91 वर्ष की आयु में
माघ शुक्लपक्ष, पुनर्वसु नक्षत्र में द्वादशी तिथि को गुरुवार के दिन प्रातः काल में ये देह का त्याग करते है।

प्रश्न- मीन राशि के नाम का पहला अक्षर क्या-क्या होता है।

उत्तर- तीन नक्षत्र और 9 चरण मिल कर एक मीन राशि बनता है,
जिसमे पूर्व भाद्रपद नक्षत्र का एक चौथा चरण, उतरा भाद्रपद नक्षत्र का चार चरण
और रेवती नक्षत्र का चार चरण शामिल होता है।
मीन, राशि चक्र की 12वीं राशि है। इस राशि के नाम का पहला अक्षर दी, दू, घ, झ, ञ, दे, दो, चा और ची होता है।

प्रश्न- आयु क्या-क्या चीज पर निर्भर करती है?

उत्तर- किसी भी व्यक्ति की आयु, खान-पान, अच्छे-बुरे कर्म, स्वभाव और
जन्म के समय नक्षत्र की स्थिति आदि पर निर्भर करती है।

निर्देश

यहाँ दी गयी सूचना सिर्फ ज्योतिष, मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है।
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इसलिए किसी भी सुचना को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से एक बार सलाह जरूर लें।

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